पार्टी की विचारधारा

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 पार्टी की साम्यवादी विचारधारा

पार्टी साम्यवादी विचारधारा की प्रबल समर्थक है परन्तु वह पूर्णतः मार्क्सवादी नहीं है l वह हिंसा पर विश्वास नहीं करती तथा धर्म को मनुष्य के मस्तिष्क तथा जीवन के लिए अतिआवश्यक मानती है l अफीम नहीं जैसा कि मार्क्सवादी ने कहा था l पार्टी का यह प्रयास रहेगा कि पूंजीपति तथा सर्वहारा वर्ग आपस में एक दुसरे के विकास में योगदान दें तथा कोई वर्ग किसी अन्य वर्ग का अनुचित शोषण न कर सके |

1. पार्टी यह मानती है कि उत्पादन पर समाज का अधिकार होना चाहिए तथा सम्पत्ति का वितरण भी समाज द्वारा होना चाहिए l सम्पत्ति की उत्पत्ति का मुख्य साधन श्रम है इसीलिए उत्पन्न संपत्ति को कार्य या श्रम के अनुसार श्रमिकों में वितरित करना चाहिए l लाभ जो कि पूंजीपति प्राप्त करता है उसमे श्रमिकों को उचित हिस्सा मिलना चाहिए |

2. सम्पत्ति का उपभोग भी सामूहिक दृष्टि से होना चाहिए l इसलिए यह आवश्यक है कि चिकित्सा, शिक्षा तथा अपंगता की दशा में निर्वाहन आदि की सामूहिक व्यवस्था की जाए l कोई भी मनुष्य जीवन की आवश्यकताओं को पूर्ण करने से वंचित न रह जाए |

3. पार्टी यह मानती है कि वर्ग – संघर्ष है और चलता रहता है परन्तु हम मेल – जोल की कोशिशें करते रहेंगे |

4. सांसद निधि बढ़ाना जिससे कि वह सांसद ठीक से जिले का विकास कर सके |

5. आर्थिक मामलों में प्रशासनिक अधिकारियों का हस्तक्षेप कम करना |

6. भारत की विदेशनीति मजबूत करना तथा एशियाई महाद्वीपों में उसकी स्थिति मजबूत करना |

7. पुलिस बल का केन्द्रीयकरण करना तथा आधुनिक सुविधाओं से लैस करना |

8. अल्पसंख्यकों के जीवन स्तर में सुधार करना तथा उन्हें भयमुक्त एवं विकासयुक्त वातावरण उपलब्ध कराना |

9. दलितों में एवं पिछड़ों में स्वाभिमान का संचार करना तथा उनके विकास के लिए हर संभव कोशिश करना |

“राष्ट्रीय साम्यवादी आर्यन पार्टी” इस बात को जोर देकर स्वीकारती है कि आर्य मूल रूप से उत्तर भारत (पंजाब, हिमाचल प्रदेश. राजस्थान, उत्तर प्रदेश तथा बिहार) आदि के मूल निवासी हैं l जो तिब्बत तक बिखरे हुए थे तथा यह एक तथ्य ब्रह्मक है कि आर्य मध्य एशिया (ईरान) के निवासी थे l इसका पार्टी खंडन करती है l आज विभिन्न जाति धर्म में विभाजित हम भारतवासी एक हैं l कोई ऊँचा – नीचा नहीं था |

“राष्ट्रीय साम्यवादी आर्यन पार्टी” देश में एकता का आधार यह मानती है कि हम सभी भारतवासी जो चार वर्णों में विभाजित हैं वे वस्तुतः एक ही नस्ल के हैं | हम सभी आर्यों की संतांने हैं l जो वैदिक युग में फली फूली थी l पार्टी वही आर्य गौरव पुनः स्थापित करने को कटिबद्ध है l जिससे सम्पूर्ण विश्व में पुनः भारत अपना “विश्वगुरु” का स्थान ले सके |

अलग अलग जातियों में बांटने के कारण आर्य – शासन का पतन हुआ था, इसीलिए हम यह प्रयत्न करेंगे कि जातिवाद समाज से पूर्णतः समाप्त किया जाए | सभी जाति तथा धर्मों के लोग एक ही पूर्वजों की संतानें हैं l पार्टी यह प्रयास करेगी कि सदियों से वंचित दबे – कुचले दलित तथा पिछड़े वर्ग के लोग अपने आप को आर्य का वंशज महसूस करें और गर्व से रहें l जब हर नागरिक अपने को बराबर महसूस करेगा तभी सच्चे अर्थों में “राष्ट्रीय साम्यवाद” का दर्शन मूर्त रूप प्राप्त करेगा |